साहिबगंज में झमाझम मानसूनी बारिश: लैम्प्स और पैक्स के जरिए किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर मिल रहा बीज

Blog
 Image

साहिबगंज जिले के किसानों के लिए लंबे समय का इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। जिले में मानसून की पहली झमाझम बारिश से मौसम का मिजाज बदल गया है। सुबह से ही हो रही लगातार बारिश ने न सिर्फ लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत दी है, बल्कि कृषि क्षेत्र, विशेषकर खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान के लिए यह बारिश एक बड़ी संजीवनी बनकर आई है। खेतों में पानी जमा होने से अब किसान तेजी से खेती के कार्यों में जुट गए हैं।

इस साल जून महीने में बारिश न होने के कारण किसान बेहद परेशान थे। जिन किसानों ने मई महीने में हुई हल्की बारिश के भरोसे धान का बिचड़ा (नर्सरी) गिरा दिया था, वे जून की चिलचिलाती धूप में पौधों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। पानी की कमी के कारण धान के पौधे ठीक से पनप नहीं पा रहे थे। ऐसे नाजुक समय में हुई इस मानसूनी बारिश ने खेतों में नई जान फूंक दी है। जिला कृषि पदाधिकारी प्रमोद एक्का ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि इस वर्ष मौसम पर 'अलनीनो' घटक का गहरा प्रभाव देखा जा रहा है। यही वजह है कि मानसून के आगमन में देरी हुई और बारिश आवश्यकता से कम दर्ज की गई है। साहिबगंज में जून महीने में सामान्यतः 225.40 एमएम बारिश की आवश्यकता होती है, लेकिन अब तक मात्र 99 एमएम बारिश ही रिकॉर्ड की गई है। इस सीजन में कुल मिलाकर करीब 20 प्रतिशत कम बारिश होने की आशंका जताई जा रही है। कम बारिश की चुनौती से निपटने के लिए जिला कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है। किसान अपने खेतों की बार-बार गहरी जुताई करें। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और बारिश न होने पर भी खेतों की नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है। सुखाड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए किसान पारंपरिक धान के बजाय कम दिनों (शॉर्ट ड्यूरेशन) में तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन करें, ताकि कम पानी में भी अच्छी पैदावार मिल सके। जिले के लैम्प्स और पैक्स के माध्यम से किसानों को 50 प्रतिशत अनुदानित दर पर धान के प्रमाणित बीज बांटे जा रहे हैं। कृषि विभाग ने इस बार 5,000 क्विंटल धान के बीज की मांग की थी, जिसके एवज में बीज वितरण निगम ने 2,300 क्विंटल बीज का आदेश जारी किया है। वर्तमान में विभाग को 430 क्विंटल बीज प्राप्त हो चुका है, जिसका वितरण सकरोगढ़ लैम्प्स और एफपीओ बोरियो समेत अन्य केंद्रों से किया जा रहा है। यह लाभ विशेष रूप से उन किसानों को मिल रहा है जो सरकारी 'ब्लॉकचेन प्रणाली' से रजिस्टर्ड हैं। कृषि पदाधिकारी ने आश्वस्त किया है कि जिले में किसानों के लिए बीज की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।