Feb 04, 2026

उत्तराखंड में स्वास्थ्य योजनाओं में बदलाव से मरीजों को कागजी कार्रवाई से बड़ी राहत

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स्वास्थ्य विभाग ने हेल्थ फैसिलिटीज को बेहतर बनाने के लिए इस साल तमाम बड़े बदलाव करने का लक्ष्य रखा है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अटल आयुष्मान योजना और गोल्डन कार्ड योजना में किया जाना है। पिछले साल राज्य सरकार ने निर्णय लिया था कि अटल आयुष्मान योजना को इंश्योरेंस मोड और गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड पर संचालित किया जाएगा। इस योजना के धरातल पर उतरने के बाद न सिर्फ आम जनता को इलाज मिलने में काफी सहूलियत होगी। साथ ही राज्य सरकार की काफी टेंशन भी इससे दूर हो जाएगी। आखिर क्या है ये योजना, मरीज या उनके तामीरदारों को कागजी कार्रवाई से किस तरह से मिलेगी राहत? 

उत्तराखंड हेल्थ स्कीम पॉलिसी के आंकड़े
उत्तराखंड में अटल आयुष्मान योजना 25 दिसंबर 2018 को शुरू हुई। 
जिसके बाद से अभी तक 17 लाख से अधिक मरीजों का निशुल्क इलाज किया गया। 
जिस पर राज्य सरकार ने 3400 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। 
प्रदेश में करीब 61 लाख से अधिक लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। 
इसी तरह, उत्तराखंड में संचालित गोल्डन कार्ड योजना के तहत पिछले 5 सालों में करीब 750 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। 
इस योजना के तहत कर्मचारियों की ओर से मिलने वाला अंशदान करीब 60 से 65 फीसदी रहा है। 
यही वजह है कि राज्य सरकार ने अटल आयुष्मान योजना और गोल्डन कार्ड योजना में बदलाव करने का निर्णय लिया है। 

दरअसल, पिछले साल 24 दिसंबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान कैबिनेट में स्वास्थ्य विभाग के इस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी। इसके बाद से ही स्वास्थ्य विभाग इस प्रक्रिया को लागू करने की कोशिशें शुरू की। इस प्रक्रिया के लागू होने के राज्य सरकार पर निशुल्क इलाज के लिए बढ़ रहे खर्च का वहन कम होगा। दूसरी ओर आसानी और सुलभ तरीके से मरीज को भी लाभ मिल सकेगा। गोल्डन कार्ड योजना के तहत कर्मचारियों से लिए जाने वाले अंशदान में बढ़ोत्तरी होगी। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड की मिशन निदेशक रीना जोशी ने कहा आयुष्मान योजना के संचालन में बदलाव करने का निर्णय लिया गया है। इससे आयुष्मान कार्ड धारकों को कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि जिस तरह से उन्हें स्वास्थ्य सुविधा का निशुल्क लाभ मिल रहा है वो उन्हें मिलता रहेगा। हां इतना जरूर है कि अभी तक इलाज का क्लेम, अस्पतालों की ओर से राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण से लिया जा रहा था। अब वो इंश्योरेंस कंपनी के जरिए दिया जाएगा। इस निर्णय के बाद आयुष्मान योजना की एफिशिएंसी और अधिक बढ़ेगी। रीना जोशी ने बताया आयुष्मान कार्ड योजना को इंश्योरेंस मोड पर संचालित करने के तहत लाभार्थियों को कोई अलग नंबर नहीं दिया जाएगा। आयुष्मान कार्ड के जरिए ही निशुल्क इलाज का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा इससे सरकार और जनता दोनों को ही लाभ होगा। वही, स्वास्थ्य महानिदेशक सुनीता टम्टा ने कहा गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड पर चलने का निर्णय लिया गया है, अभी तक गोल्डन कार्ड योजना के तहत कैशलेस इलाज की व्यवस्था थी। इसमें 5 लाख रुपए तक ही प्रतिपूर्ति का प्रावधान था। ऐसे में इस योजना के तहत गोल्डन कार्ड धारकों को 5 लाख रुपए तक के इलाज को कैशलेस सुविधा के रूप में संचालित किया जाएगा। अगर इलाज का खर्च 5 लाख से अधिक होता है तो उसे इंश्योरेंस मोड पर संचालित किया जाएगा।