Mar 11, 2026

उत्तराखंड में बजट नियमों का उल्लंघन: अलग-अलग सरकारों ने अनुमानित राशि से अधिक किया सरकारी धन का उपयोग

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उत्तराखंड में अलग-अलग सरकारों के शासन में 20 वर्ष में बिना बजट प्रावधान के 55 हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च की है। यह खुलासा कैग की राज्य के वित्त पर लेखापरीक्षा प्रतिवेदन रिपोर्ट में हुआ है। कैग ने विधायी स्वीकृति के बिना ही सरकारी धन को व्यय करना खराब योजना का सूचक है। साथ ही विधायी प्रावधानों का उल्लंघन है। सरकार की ओर से आय-व्यय का वार्षिक बजट विधानसभा से पारित किया जाता है। इसमें विभागों को अनुमानित बजट का प्रावधान किया जाता है। लेकिन राज्य में अलग-अलग सरकारों में बजट प्रावधानों से अधिक की व्यय किया गया।

वर्ष 2023-24 के दौरान सरकार ने पूंजीगत व राजस्व प्राप्तियों के बीच गलत वर्गीकरण किया। राजस्व प्राप्ति में 70 लाख के बड़े कार्य व 61.96 करोड़ के भूमि खरीद व्यय को शामिल किया। जबकि पूंजीगत व्यय में 605 करोड़ का व्यय शामिल किया। कैग की रिपोर्ट के अनुसार पूंजीगत व्यय में स्थायी बुनियादी ढांचे, सड़क, भवन निर्माण किए जाते हैं। वर्ष 2019-20 में पूंजीगत व्यय 5414 करोड़ था। जो बढ़ कर वर्ष 2023-24 में 10982 करोड़ हो गया। जो एफटीएमपीएस लक्ष्यों से 579 करोड़ अधिक है। पांच वर्ष की अवधि में वेतन व मजदूरी में 22.43 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2019-20 में 11714 करोड़ की राशि वेतन व मजदूरी पर खर्च का अनुमान था। जो 2023-24 में बढ़ कर 14,341 करोड़ पहुंच गया। इसके अलावा व्यावसायिक व विशिष्ट सेवाओं पर 192.48 करोड़ रुपये व्यय किए गए। वेतन भत्तों व अन्य व्ययों के लिए 1352.41 करोड़ का सहायता अनुदान दिया गया। रिपोर्ट में कैग ने सवाल उठाए कि गैर प्रतिबद्ध व्यय में सब्सिडी की प्रवृत्ति बढ़ रही है। 2019-20 में सब्सिडी 35 करोड़ थीं, जो 2023-24 में 428 करोड़ हो गई है। इससे राजस्व व्यय में 0.91 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। खाद्य सब्सिडी पर 76.54 करोड़ व्यय किए जा रहे हैं।