सहकारी सप्ताह की बैठक में बड़ा फैसला, स्थानीय किसानों के लिए खुलेगा हंसडीहा लैम्पस

Blog
 Image

हंसडीहा। झारखंड के दुमका जिले के हंसडीहा क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए खेती-किसानी के इस चालू सीजन में एक बहुत ही बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले करीब आठ वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा और जर्जर व्यवस्था के कारण बंद पड़े हंसडीहा लैम्पस (बहुउद्देशीय सहकारी समिति) के जल्द दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। जिला सहकारिता पदाधिकारी कर्मवीर मेहता के त्वरित हस्तक्षेप के बाद इसके संचालन की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल की गई है। इस फैसले के बाद वर्षों से खाद और बीज के लिए परेशान स्थानीय किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।

हंसडीहा पंचायत सचिवालय में केंद्र सरकार के निर्देशानुसार 29 जून से 6 जुलाई तक आयोजित होने वाले 'सहकारी सप्ताह समारोह' की तैयारियों को लेकर शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी। बैठक की अध्यक्षता जिला सहकारिता पदाधिकारी कर्मवीर मेहता कर रहे थे, जिसमें सरैयाहाट, रामगढ़ और जरमुंडी प्रखंड के सहकारिता अधिकारी, लैम्पस अध्यक्ष और सहायक प्रबंधक मौजूद थे। इसी बैठक के दौरान हंसडीहा पंचायत की मुखिया आशा हेंब्रम ने मंच से स्थानीय किसानों की सबसे बड़ी और दर्दनाक समस्या को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने बताया कि हंसडीहा लैम्पस करीब आठ साल से पूरी तरह ठप पड़ा है। इसके बंद होने के कारण क्षेत्र के गरीब किसानों को सरकारी दर पर मिलने वाला धान का बीज, खाद और सहकारिता विभाग की अन्य कल्याणकारी योजनाएं नहीं मिल पा रही हैं। मजबूरन किसानों को निजी दुकानों और दूसरे सुदूर क्षेत्रों में जाकर महंगी कृषि सामग्री खरीदनी पड़ती है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। मुखिया की इस जायज शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला सहकारिता पदाधिकारी कर्मवीर मेहता ने बिना वक्त गंवाए मौके पर ही हंसडीहा लैम्पस के प्रबंधक जालिम राय को तलब कर जवाब मांगा। प्रबंधक ने अपनी लाचारी बताते हुए कहा कि पुराने लैम्पस भवन की स्थिति अत्यंत जर्जर और खतरनाक हो चुकी है, जिसके कारण वहां काम करना किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा था। इसी सुरक्षा कारणों से वर्षों पहले काम बंद करना पड़ा था।

प्रबंधक ने एक विकल्प देते हुए बताया कि, "हंसडीहा हटिया मैदान स्थित नए सरकारी गोदाम भवन से लैम्पस का संचालन तुरंत शुरू किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय से उस गोदाम की चाबी उपलब्ध नहीं होने के कारण हमारा हाथ बंधा हुआ था।" मामले की नब्ज को भांपते हुए डीसीओ कर्मवीर मेहता ने तत्काल कड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया और मौके पर ही गोदाम की चाबी मंगवाकर लैम्पस प्रबंधक को सौंप दी। इसके साथ ही उन्होंने सख्त निर्देश दिया कि बिना किसी देरी के हंसडीहा लैम्पस का संचालन हटिया मैदान के गोदाम से शुरू किया जाए ताकि किसानों को तुरंत इसका लाभ मिले। इससे पहले, बैठक में सहकारी सप्ताह के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई। डीसीओ ने बताया कि आगामी 29 जून को गरिमामयी शपथ ग्रहण के साथ इस विशेष अभियान की शुरुआत होगी। इसके बाद पूरे सप्ताह बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान, पौधरोपण, किसान जागरूकता कार्यक्रम और सहकारी समितियों को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। बैठक के समापन पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अधिकारियों और मुखिया ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों के बीच पौधों का वितरण किया। डीसीओ की इस त्वरित और दूरदर्शी पहल के बाद बैठक में मौजूद किसानों, पैक्स प्रतिनिधियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने तालियां बजाकर खुशी का इजहार किया। ग्रामीणों का कहना है कि हंसडीहा लैम्पस इस क्षेत्र के कृषि विकास की रीढ़ है। यदि यह जल्द शुरू हो जाता है, तो इस खरीफ सीजन में किसानों को खाद और उन्नत किस्म के बीज समय पर मिलेंगे और उन्हें बिचौलियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक में रामगढ़ प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी धीरज कुमार, जरमुंडी के गणेश वर्णवाल, सरैयाहाट के हरे कृष्णा देव सहित तीनों प्रखंडों के कई गणमान्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे।