झारखंड मौसम अपडेट: 30 जून से धनबाद, बोकारो और देवघर में होगी भारी मूसलाधार बारिश

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रांची। झारखंड में चिलचिलाती गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत की बड़ी खबर है। राज्य में मॉनसून के धीरे-धीरे सक्रिय होने और एक नए साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र) के बनने से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची ने आगामी 30 जून और 1 जुलाई को राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ भारी से अति भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग ने सुरक्षा के लिहाज से कई संवेदनशील इलाकों में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी कर लोगों को वज्रपात (बिजली गिरने) के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 28 जून से ही राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। इसके बाद 30 जून को मॉनसून रफ्तार पकड़ेगा। इस दिन विशेष रूप से बोकारो, गिरिडीह, देवघर, धनबाद, जामताड़ा, पाकुड़, दुमका, साहिबगंज और गोड्डा जिलों में भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इन जिलों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी मेघ गर्जन और तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। जुलाई की शुरुआत झारखंड के लिए बेहद धमाकेदार होने वाली है। 1 जुलाई को भारी बारिश का दायरा और बढ़ जाएगा। मौसम केंद्र ने बताया कि इस दिन राजधानी रांची सहित खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसांवा, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, जामताड़ा, देवघर, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज में 60 से 100 मिलीमीटर (मिमी) तक मूसलाधार बारिश हो सकती है। इसे देखते हुए इन क्षेत्रों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। शनिवार को राज्य के मौसम में काफी विविधता देखने को मिली। जहां एक तरफ पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जिलों में लोग भीषण लू से बेहाल रहे, वहीं दूसरी तरफ कई जिलों में हल्की बारिश ने मौसम खुशनुमा बना दिया। मौसम वैज्ञानिकों ने एक चिंताजनक आंकड़ा भी साझा किया है। इस बार वैश्विक मौसमी घटना 'अलनीनो' के चलते झारखंड में मॉनसून की शुरुआत बेहद कमजोर रही है। पिछले 27 दिनों में राज्य में सामान्य से 62 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि 30 जून से शुरू हो रहा यह नया स्पेल इस कमी को काफी हद तक पूरा करेगा और किसानों के चेहरे पर भी मुस्कान वापस लाएगा। अधिकारियों ने अपील की है कि खराब मौसम के दौरान लोग पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।